वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य: एक धीमा ज़हर जिसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
लेखक: डॉ. कल्याण सिंह
पिछले कई दशकों तक वायु प्रदूषण को केवल एक पर्यावरणीय असुविधा के रूप में देखा गया। लेकिन आज विज्ञान इसे PM2.5 नामक सूक्ष्म कणों वाला एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट मानता है। यह शरीर में धीरे–धीरे जमा होने वाला विष (टॉक्सिन) है, जो जीवन प्रत्याशा को कम करता है।
PM2.5 इतना ख़तरनाक क्यों है?
PM2.5 कण मानव बाल से 30 गुना पतले होते हैं। ये नाक और गले की सुरक्षा को पार कर सीधे रक्त प्रवाह में शामिल हो जाते हैं और हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे और यहाँ तक कि गर्भनाल (प्लेसेंटा) तक पहुँच जाते हैं।
दैनिक वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत:
- वाहनों का धुआँ (विशेषकर डीज़ल)
- औद्योगिक उत्सर्जन और ईंट भट्टे
- निर्माण कार्यों की धूल
- कचरा और पराली जलाना
- ठोस ईंधन से खाना पकाना
शरीर के अंदर क्या होता है?
PM2.5 रक्त में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन (हल्की सूजन) पैदा करता है। लक्षणों का न होना, नुकसान का न होना नहीं है। यह प्रक्रिया धमनियों की उम्र बढ़ाती है और रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ा देती है।
नुकसान जन्म से पहले ही शुरू
गर्भावस्था के दौरान प्रदूषित हवा प्लेसेंटा में सूजन पैदा करती है, जिससे भ्रूण तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। इसका संबंध कम जन्म वजन और समय से पहले प्रसव से पाया गया है।
ज़रूरी सच्चाइयाँ
- PM2.5 के संपर्क का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है।
- “हल्का” प्रदूषण भी कम जोखिम है, शून्य नहीं।
- सामान्य महसूस करना सुरक्षा का प्रमाण नहीं है।
स्वच्छ हवा कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि एक बुनियादी आवश्यकता है। इसे नज़रअंदाज़ करना इसे स्थायी और अनिवार्य बना देता है।
— डॉ. कल्याण सिंह