कसोल में GLOF जोखिम न्यूनीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
कुल्लू 13 मार्च।
प्रदेश आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं तैयारी कार्यक्रम के अंतर्गत ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जोखिम न्यूनीकरण एवं आपदा तैयारी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला कसोल में आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से किया गया।
निशांत ठाकुर (अतिरिक्त सचिव): "जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिक निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।"
महत्वपूर्ण बिंदु:
- GLOF संवेदनशील क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर छोटे समूह गठित करने का सुझाव।
- मणिकर्ण घाटी की वासुकि झील (4500 मीटर ऊंचाई) को संवेदनशील माना गया।
- पार्वती नदी में अचानक बाढ़ के खतरे को देखते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम पर कार्य जारी।
कार्यशाला में एनसीपीओआर के वैज्ञानिक, आपदा मित्र, आशा कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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