माता पार्वती के सम्मान में जलुग्रां में धूमधाम से सजा बिरशू मेला, सैकड़ों महिलाओं ने किया सामूहिक नृत्य
कुल्लू। जिला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी के जलुग्रां गांव में माता पार्वती के सम्मान में पारंपरिक बिरशू मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और माता के साथ सामूहिक नृत्य कर आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
मेले की शुरुआत सुबह के समय भगवान नृसिंह मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। गांव की महिलाओं के साथ-साथ वे बेटियां भी विशेष रूप से इस आयोजन में शामिल हुईं, जो विवाह के बाद अपने ससुराल से मायके लौटी थीं। सभी ने मिलकर माता पार्वती की श्रद्धा भाव से पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की।
स्थानीय परंपरा के अनुसार इस धार्मिक अनुष्ठान को “धूप देना” कहा जाता है। इसमें महिलाएं एकत्र होकर देवी को धूप अर्पित करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
सायंकाल के समय बिरशू मेले का मुख्य आकर्षण देखने को मिला, जब सैकड़ों महिलाएं एक साथ एकत्र होकर माता के रथ के साथ पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करने लगीं। ढोल-नगाड़ों और लोक वाद्य यंत्रों की धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता पार्वती से आशीर्वाद प्राप्त किया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का भी माध्यम है। सदियों पुरानी यह देव परंपरा आज भी लोगों को एकजुट करती है और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।

