आत्मिक शक्ति का माध्यम ध्यान साधना -राष्ट्र सन्त आचार्य सुधांशु जी महाराज
शान्त मस्तिष्क परमात्मा का वास -योग गुरु डॉ अर्चिका दीदी
"शुद्ध भावना से मिलती है असीम शान्ति"
Love Peace And Happyness जीवन का असली उद्देश्य
मनाली ध्यान साधना का दूसरा हुआ सम्पन्न
आत्मिक शक्ति का माध्यम जप, तप, साधना,
सुरम्य व शान्त वातावरण में चल रहे ध्यान साधना शिविर के दूसरे दिवस प्रातःकालीन समारोह में उपस्थित साधकों को बोलते हुए पूज्य गुरुदेव श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि मानसिक रूप से तनाव को बाहर निकालकर फिर से बैलेंस बनाएं और भावनात्मक रूप से इतना सबल हो जाएं कि कोई भी ताकत विपरित परिस्थितियों में भी हिला न सके। जब तक जीवन में कोशिश नहीं करेंगे तब तक अपनी कमजोरी को दूर नहीं कर पाएंगे इसलिए हर दिन सवेरे उठकर अपने नकारात्मक विचारों का शुद्धिकरण करें और शुभ विचार मन में आए इसकी कल्पना करें। पवित्र भाव मन में आए तथा प्रभु से समस्त कमजोरियों को दूर करने की शक्ति मांगें। उन्होंने आत्मिक शक्ति के लिए ध्यान साधना को एक सशक्त माध्यम बताया।
राष्ट्र सन्त आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने आगे कहा कि जन्म देने वाले माता पिता पर परमात्मा अपनी कृपा सदैव बनाएं रखें ताकि हम उनके बालक बालिकाएं इस जीवन में आकर उनका आभार व्यक्त करते हुए अपना फर्ज पूरा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक शुभ भावना नहीं होगी तब तक किसी भी माध्यम से कल्याण सम्भव नहीं है। परम श्रद्धेय श्री सुधांशु जी महाराज ने सर्व मंगल कामना करते हुए भगवान सबको सुख देना कल्याण करना, मन पवित्र करना हर दिन सूर्य खुशियां लेकर आए ऐसी कामना की।
ध्यान गुरु डॉ अर्चिका दीदी ने कहा कि अपने मन को शान्त करते हुए पूरे शरीर में शान्ति की किरणों को अनुभव करें और बोले कि मैं अशांति से शांति की ओर जा रहा हूं, स्वयं भू से स्वयं को जानने का प्रयास कर रहा हूं। लंबी गहरी सांस लें और छोड़ें, और महसूस करें सांस लेते हैं तब शान्ति प्राप्त होती है। दीदी जी ने सभी को ध्यान के माध्यम से परमात्मा से मिलने का मार्ग बताकर सभी को करने की सलाह दी।
श्री पवन गुप्ता जी ने बताया कि ध्यान साधना शिविर में विदेशों सहित देश भर से कई राज्यों से साधक देवभूमि हिमाचल प्रदेश आकर अपने भाग्य को साधना के द्वारा जागृत कर रहे हैं।


