कुल्लू। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बंदी सुधार एवं पुनर्वास कार्यक्रम ‘अंतर्क्रांति’ के तहत सोमवार को जिला कारागार कुल्लू में आध्यात्मिक चिंतन एवं भजन-कीर्तन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई। साध्वी गुरुगीता भारती और साध्वी कंचन भारती ने भजन प्रस्तुत किए। महात्मा डॉ. अवमिंदर ने ‘अंतर्क्रांति’ प्रकल्प की जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल बंदियों के आंतरिक परिवर्तन और पुनर्वास के लिए कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य उनमें आत्मसम्मान, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। स्वामी धीरानंद ने सत्संग के दौरान कहा कि आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहार का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। गलतियों को स्वीकार कर उनसे सीखना और बेहतर आचरण का संकल्प लेना जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। उन्होंने सत्य, संयम, धैर्य, क्षमा और सद्भाव जैसे मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। जेल अधिकारी विशाल डोगरा ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों को जीवन में सकारात्मक दिशा अपनाने और भविष्य के प्रति आशावान रहने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान भविष्य में भी बंदियों के कल्याण एवं पुनर्वास के लिए संयुक्त रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे।