कुल्लू। नई दिशा केंद्र (NDK) के तत्वावधान में आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ. रंजित ठाकुर की अध्यक्षता में नशा मुक्ति एवं जागरूकता विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल ऑफिसर्स, हेल्थ एजुकेटर्स, सुपरवाइजर्स, काउंसलर्स तथा विभिन्न विकासखंडों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF), भुंतर के नोडल ऑफिसर डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने ड्रग एडिक्शन, नशे से बचाव, नशे के दुष्प्रभाव तथा नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि ड्रग एडिक्शन को केवल एक सामाजिक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य स्वास्थ्य समस्या/बीमारी के रूप में समझना आवश्यक है। उचित उपचार, चिकित्सकीय देखभाल और आवश्यक दवाइयों के माध्यम से नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति को उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
डॉ. वैद्य ने बताया कि ओपिओइड संबंधी नशे की लत के उपचार में चिकित्सकीय रूप से निर्धारित दवाइयों एवं उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों की देखरेख आवश्यक है। उन्होंने नशे की शुरुआत को रोकने, समय रहते पहचान करने तथा प्रभावित व्यक्ति को उपचार केंद्र तक पहुंचाने में परिवार, समुदाय और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को कलंकित या अपमानजनक शब्दों से संबोधित नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार अपनाना चाहिए तथा उन्हें उपचार और पुनर्वास के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए समय पर उपचार और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला के दौरान नशे से बचाव के उपायों, नशे के दुष्प्रभाव, प्रारंभिक पहचान, काउंसलिंग, उपचार तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि नशे से प्रभावित व्यक्ति एवं उसके परिवार को सही मार्गदर्शन देकर उसे उपचार सेवाओं से जोड़ना सामुदायिक स्तर पर नशा नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी अवसर पर विश्व हृदय दिवस भी मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजित ठाकुर ने हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव पर नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को तंबाकू, शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी, क्योंकि इनका हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।डॉ. ठाकुर ने संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और कम वसा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए तथा अधिक नमक, चीनी, तले-भुने और अत्यधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी को भी आवश्यक बताया।
कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नशे की समस्या की पहचान, रोकथाम, उपचार एवं पुनर्वास संबंधी जानकारी प्रदान करना तथा समाज में नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक और गैर-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा। साथ ही, विश्व हृदय दिवस के माध्यम से लोगों को हृदय रोगों से बचाव, संतुलित आहार और नशामुक्त स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।