“विकास की कीमत स्थानीय लोगों के आशियानों से नहीं चुकाई जा सकती: पालचरा पहुंचकर विधायक सुरेंद्र शौरी ने NHPC से मांगी जवाबदेही

कुल्लू:  ग्राम पंचायत रैला-I के पालचरा गांव में NHPC की जल विद्युत परियोजना की भूमिगत एडिट (Adit) सुरंग से जल रिसाव के बाद हुए भूस्खलन से दो मकानों सहित अन्य भवनों को पहुंचे नुकसान का विधायक सुरेंद्र शौरी ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। विधायक ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।
विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाएं क्षेत्र के विकास और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास की कीमत स्थानीय लोगों की सुरक्षा और उनके आशियानों को नुकसान के रूप में नहीं चुकाई जा सकती। परियोजना प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि निर्माण एवं संचालन के दौरान स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पालचरा में सामने आई घटना को केवल एक सामान्य प्राकृतिक या तकनीकी भूल की आपदा मानकर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। भूमिगत एडिट से हुए जल रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन की समस्या बेहद गंभीर है क्योंकि कुछ अन्य स्थानों पर भी भूमिगत जल सुरंग(एडिट) से जल रिसाव की बात सामने आई है, सभी स्थानों की तकनीकी एवं वैज्ञानिक जांच होना आवश्यक है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम से स्थल का परीक्षण करवाया जाना चाहिए। ताकि भविष्य में किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।  विधायक ने कहा कि प्रभावित परिवारों के मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का निष्पक्ष एवं पारदर्शी आकलन करवाकर उन्हें उचित राहत एवं मुआवजा दिलाने के लिए वे प्रशासन और संबंधित परियोजना प्रबंधन के समक्ष प्रभावी ढंग से मामला उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्थानीय लोगों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा। परियोजना की भूमिगत संरचनाओं से कुछ अन्य स्थानों पर भी जल रिसाव तो की शिकायत सामने आई है और ग्रामीणों द्वारा शिकायत भी दर्ज करवाई गई है। परिवारों के नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी पूरी तरह से NHPC प्रबंधन पर डाली जानी चाहिए। विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र में तत्काल आवश्यक सुरक्षा व राहत के उपाय के निर्देश किए व विशेषज्ञों के माध्यम से भू-तकनीकी स्थिति का आकलन करवाया जाने की बात कहीं है। सुरेंद्र शौरी ने कहा कि सैंज घाटी ने देश की ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए घाटी के लोगों का भी यह अधिकार है कि उन्हें विकास का लाभ मिले, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो और किसी भी परियोजना के कारण उत्पन्न होने वाली समस्या की जिम्मेदारी तय की जाए।

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